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दहलीज़ पर आँखें

( एडमिन द्वारा दिनाँक 02-12-2017 को प्रस्तुत )
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रात देर तक तेरी दहलीज़ पर
बैठी रहीं आँखें,
खुद न आना था तो कोई
ख्वाब ही भेज दिया होता।

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