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ये हैरत-ए-दिल

( एडमिन द्वारा दिनाँक 25-12-2017 को प्रस्तुत )
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आँखों से लड़े गेसु-ए-खमदार से उलझे,
ये हैरत-ए-दिल रोज ही दो-चार से उलझे।

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