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ज़ख्म की गहराई

( हरीश कुमार द्वारा दिनाँक 18-01-2018 को प्रस्तुत )
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तुम्हें क्या बताये इश्क़ में मिलता है दर्द क्या...
मरहम भी पिघल जाते हैं ज़ख्म की गहराई देखकर।

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