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डूबी हैं मेरी उँगलियाँ

( एडमिन द्वारा दिनाँक 04-02-2015 को प्रस्तुत )
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डूबी हैं मेरी उँगलियाँ खुद अपने लहू में,
ये काँच के टुकड़ों को उठाने के सज़ा है...!

~ परवीन शाकिर
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