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हुनर लचकने का

( मो. सरताज द्वारा दिनाँक 22-02-2018 को प्रस्तुत )
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आँधियाँ हसरत से अपना सर पटकती रहीं,
बच गए वो पेड़ जिनमें हुनर लचकने का था।

हुनर लचकने का शायरी
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