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अजब सा गुबार

( एडमिन द्वारा दिनाँक 05-03-2018 को प्रस्तुत )
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छुपाये दिल में अजब सा गुबार बैठे हैं,
न जाने कैसे तसव्वुर में यार बैठे हैं,
लुटा चुके हैं मुरव्वत में ज़िन्दगी अपनी,
तेरे लिए तो अना को भी मार बैठे हैं।

अजब सा गुबार शायरी
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