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न हिज्र है

( एडमिन द्वारा दिनाँक 30-05-2018 को प्रस्तुत )
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न हिज्र है, न वस्ल है, अब इसको क्या कहें,
फूल शाख पर तो है मगर खिला नहीं रहा।

न हिज्र है शायरी
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