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ज़िन्दगी भोर है

( एडमिन द्वारा दिनाँक 27-10-2015 को प्रस्तुत )
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हो के मायूस न यूं शाम से ढलते रहिये,
ज़िन्दगी भोर है सूरज सा निकलते रहिये,
एक ही पाँव पे ठहरोगे तो थक जाओगे,
धीरे-धीरे ही सही राह पे चलते रहिये ।

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