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कोई मंदिर कोई मस्जिद

( दीपक कमल द्वारा दिनाँक 09-07-2018 को प्रस्तुत )
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कोई मंदिर कोई मस्जिद और कोई रब नहीं होता,
दरिंदो का अपना कोई मज़हब नहीं होता,
तबाही करने वालों का मज़हब सिर्फ तबाही है,
लहू किसका बहा उन्हें कोई मतलब नहीं होता।

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