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तेरी महफ़िल में

( सईद काज़िम अख्तर द्वारा दिनाँक 13-07-2018 को प्रस्तुत )
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हम कब तक ग़ैरों की तरह तेरी महफ़िल में रहें,
अपना तो कहो झूठा ही सही हर बात गंवारा हो हो जाये।

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