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पिला दे साक़िया

( सईद काज़िम अख्तर द्वारा दिनाँक 13-07-2018 को प्रस्तुत )
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मौका मिला है कुछ तो ख़ुलूस दिखा दे साक़िया,
क्या पता... कल तेरी महफ़िल में हम हों कि न हों,
उठा के जाम अपने हाथों से पिला दे साक़िया,
क्या पता... कल तेरी महफ़िल में हम हों कि न हों।

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