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सुबकती रही रात अकेली

( एडमिन द्वारा दिनाँक 01-11-2015 को प्रस्तुत )
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सुबकती रही रात अकेली तनहाइयों के आगोश़ में,
और वो काफिऱ दिन से मोहब्बत कर के उसका हो गया।

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