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हौसलों के सामने

( एडमिन द्वारा दिनाँक 18-08-2018 को प्रस्तुत )
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हाथ बाँधे क्यों खड़े हो हादसों के सामने,
हादसे कुछ भी नहीं हैं हौसलों के सामने।

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