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कुछ तेरी बेवफाई

( एडमिन द्वारा दिनाँक 15-11-2015 को प्रस्तुत )
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रात की गहराई आँखों में उतर आई,
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई,
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के,
कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई।

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