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शायरी झांकती उम्मीदें

( प्रीत द्वारा दिनाँक 14-12-2015 को प्रस्तुत )
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फिर सुबह एक नई रोशन हुई
फिर उम्मीदें नींद से झांकती मिली
वक़्त का पंछी घरोंदे से उड़ा
अब कहाँ ले जाए तूफाँ क्या पता ।

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