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दर्द देकर खुद सवाल मिर्ज़ा ग़ालिब

( एडमिन द्वारा दिनाँक 16-01-2016 को प्रस्तुत )
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दर्द देकर खुद सवाल करते हो,
तुम भी गालिब, कमाल करते हो;

देख कर पुछ लिया हाल मेरा,
चलो इतना तो ख्याल करते हो;

शहर-ए-दिल मेँ उदासियाँ कैसी,
ये भी मुझसे सवाल करते हो;

मरना चाहे तो मर नही सकते,
तुम भी जीना मुहाल करते हो;

अब किस-किस की मिसाल दूँ तुमको,
तुम हर सितम बेमिसाल करते हो।

~ मिर्ज़ा ग़ालिब
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