होम / दो लाइन शायरी / ग़ालिब की हिंदी उर्दू शायरी

ग़ालिब की हिंदी उर्दू शायरी

( एडमिन द्वारा दिनाँक 16-01-2016 को प्रस्तुत )
-Advertisement-

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना,
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना।
--------------------------------------
उग रहा है दर-ओ-दीवार से सबज़ा ग़ालिब,
हम बयाबां में हैं और घर में बहार आई है।
--------------------------------------
घर में था क्या कि तेरा ग़म उसे ग़ारत करता,
वो जो रखते थे हम इक हसरत-ए-तामीर सो है।
--------------------------------------
ज़िंदगी अपनी जब इस शक्ल से गुज़री,
हम भी क्या याद करेंगे कि ख़ुदा रखते थे।
--------------------------------------
ता हम को शिकायत की भी बाक़ी न रहे जा,
सुन लेते हैं गो ज़िक्र हमारा नहीं करते।
--------------------------------------
ग़ालिब तिरा अहवाल सुना देंगे हम उन को,
वो सुन के बुला लें ये इजारा नहीं करते।
--------------------------------------
मुँद गईं खोलते ही खोलते आँखें ग़ालिब,
यार लाए मेरी बालीं पे उसे पर किस वक़्त।
--------------------------------------
लो हम मरीज़-ए-इश्क़ के बीमार-दार हैं,
अच्छा अगर न हो तो मसीहा का क्या इलाज।

~ मिर्ज़ा ग़ालिब
-Advertisement-

आप इन्हें भी पसंद करेंगे

-Advertisement-
पेज शेयर करें
   
© 2015-2017 हिंदी-शायरी.इन | डिसक्लेमर | संपर्क करें | साईटमैप
Best Shayari in hindi | Love Sad Funny Shayari and Status in Hindi