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बस कसूर इतना था

( रामचन्द्र नामदेव द्वारा दिनाँक 29-02-2016 को प्रस्तुत )
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जीना चाहा तो जिंदगी से दूर थे हम,
मरना चाहा तो जीने को मजबूर थे हम,
सर झुका कर कबूल कर ली हर सजा,
बस कसूर इतना था कि बेकसूर थे हम।

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