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दिल से इन्तेकाम

( मनीष कुमार सिंह सीतामढी द्वारा दिनाँक 28-03-2016 को प्रस्तुत )
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जब कभी तेरा नाम लेते हैं,
दिल से हम इन्तेकाम लेते हैं,
मेरी बरबादियों के अफसाने
मेरे यारों का नाम लेते हैं।

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