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सज़ा देने की तहज़ीब

( एडमिन द्वारा दिनाँक 17-04-2016 को प्रस्तुत )
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दुशमनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी।
मैं हाथ नहीं उठाता, नज़रों से गिरा देता हूँ।

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