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हिंदी में अश्क़ शायरी

आंसुओं में ढलकर...

हुए जिसपे मेहरबां तुम कोई खुशनसीब होगा,
मेरी हसरतें तो निकलीं मेरे आंसुओं में ढलकर।

आंसुओं में ढलकर शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 21.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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थमे आँसू तो फिर...

थमे आँसू तो फिर तुम शौक़ से घर को चले जाना,
कहाँ जाते हो इस तूफ़ान में पानी ज़रा ठहरे।

थमे आँसू तो फिर शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 18.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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सदफ की क्या हकीकत...

सदफ की क्या हकीकत है, अगर उसमें न हो गौहर,
न क्यों कर आबरू हो आंख की मौकूफ आंसू पर।
(सदफ - सीप, गौहर - मोती)

एडमिन द्वारा दिनाँक 28.08.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

रो लेते है कभी...

रो लेते हैं कभी कभी,
ताकि आंसुओं को भी कोई शिकायत ना रहे।

अनिल कुमार साहू द्वारा दिनाँक 23.08.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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एक आँसू ने डुबोया...

एक आँसू ने डुबोया मुझ को उन की बज़्म में
बूँद भर पानी से सारी आबरू पानी हुई।

एडमिन द्वारा दिनाँक 18.07.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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