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हिंदी में ग़म शायरी

न हिज्र है...

न हिज्र है, न वस्ल है, अब इसको क्या कहें,
फूल शाख पर तो है मगर खिला नहीं रहा।

न हिज्र है शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 30-05-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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जिस दिये को हम...

हम भी कभी मुस्कुराया करते थे,
उजाले मेरे दर पर शोर मचाया करते थे,
उसी दिए ने जला दिया मेरे हाथों को,
जिस दिये को हम हवा से बचाया करते थे।

मोहन नागोसे द्वारा दिनाँक 08-05-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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वो एक रात जला...

वो एक रात जला तो उसे चिराग कह दिया,
हम बरसों से जल रहे हैं कोई तो खिताब दो।

एडमिन द्वारा दिनाँक 08-05-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें

जिसका भी ग़म मिला...

जीने का मतलब मैंने मोहब्बत में पा लिया,
जिसका भी ग़म मिला उसे अपना बना लिया,
आप रोकर भी ग़म न हल्का कर सके,
मैंने हँसी की आढ़ में हर ग़म छुपा लिया।

निखिल चौहान द्वारा दिनाँक 02-05-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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हम तेरे न हो पाए...

मोहब्बत भी, शरारत भी, शराफत भी, इबादत भी,
बहुत कुछ करके देखा फिर भी हम तेरे न हो पाए।

बिलाल द्वारा दिनाँक 20-04-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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