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हिंदी में ग़म शायरी

चाहत उसे भी थी...

देखा पलट के उसने चाहत उसे भी थी,
दुनिया से मेरी तरह शिकायत उसे भी थी,
वो रोया बहुत मुझको परेशान देख कर,
उस दिन पता चला की मेरी जरुरत उसे भी थी।

आरुही राज द्वारा दिनाँक 29-12-2017 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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रोज एक नया गम...

रोज एक नई तकलीफ रोज एक नया गम,
ना जाने कब ऐलान होगा कि मर गए हम।

एडमिन द्वारा दिनाँक 26-12-2017 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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गम की हर गली...

सिसकती हुई ज़िन्दगी का मजा हमसे पूछिये,
मोहब्बत में जो मिली वो सजा हमसे पूछिए,
क्यों फिरते हो उदास तुम इस गम की तलाश में,
गम की हर गली का पता हमसे पूछिए।

अकरम अब्बास द्वारा दिनाँक 11-12-2017 को प्रस्तुत | कमेंट करें

ग़म-ए-इश्क रह गया...

ग़म-ए-इश्क रह गया है ग़म-ए-जुस्तज़ू में ढलकर,
वो नजर से छुप गए हैं मेरी जिंदगी बदल कर।

ग़म-ए-इश्क रह गया शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 02-12-2017 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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ख्वाबों का क़त्ल...

रोज करते हैं कत्ल... हम अपने ख्वाबों का,
हकीकत में जीना इतना आसान नहीं होता।

ख्वाबों का क़त्ल शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 15-09-2017 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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