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हिंदी में हिंदी उर्दू ग़ज़ल

यूँ आँखों से ये बातें...

हमें प्यार की भाषा नहीं आती अजनबी,
यूँ आँखों से ये बातें बनाया न कीजिए।

ज़रा नादान हैं हम अभी इश्क में सनम,
यूँ सबक इश्क़ के हमें पढ़ाया न कीजिए।

न रोका कीजिए हमें राहों में इस तरह,
यूँ पकड़ के कलाई हमें सताया न कीजिए।

पत्थरों के हैं मौसम काँच के हैं रास्ते,
ख़्वाबों के इस शहर में ले जाया न कीजिए।

हम तुम्हारे हैं तो हो जाएंगे तुम्हारे,
यूँ मोहब्बत को सरे-आम दिखाया न कीजिए।

न कीजिए तारीफ हर बात में हमारी,
महफ़िलों में ग़ज़लें यूँ गाया न कीजिए।

होता है जिक्र साथ जो तुम्हारा और मेरा
बेहताशा इस कदर मुस्कुराया न कीजिए।

सुना है पूछते सब आपसे नाम हमारा,
गुजारिश है साहिब किसी से बताया न कीजिए।

हम डरते हैं बदनाम हो जाने से जरा,
मगर गुमनाम भी हमें बताया न कीजिए।

हिमांकर अजनबी

हिमांकर अजनबी द्वारा दिनाँक 26.10.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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नया शहर कोई...

सिर्फ दीवारों का ना हो घर कोई,
चलो ढूंढते है नया शहर कोई।

फिसलती जाती है रेत पैरों तले,
इम्तहाँ ले रहा है समंदर कोई।

काँटों के साथ भी फूल मुस्कुराते है,
मुझको भी सिखा दे ये हुनर कोई।

लोग अच्छे है फिर भी फासला रखना,
मीठा भी हो सकता है जहर कोई।

परिंदे खुद ही छू लेते हैं आसमाँ,
नहीं देता हैं उन्हें पर कोई।

हो गया हैं आसमाँ कितना खाली,
लगता हैं गिर गया हैं शज़र कोई।

हर्फ़ ज़िन्दगी के लिखना तो इस तरह,
पलटे बिना ही पन्ने पढ़ ले हर कोई।

कब तक बुलाते रहेंगे ये रस्ते मुझे,
ख़त्म क्यों नहीं होता सफर कोई।

~राकेश कुशवाहा

राकेश कुशवाहा द्वारा दिनाँक 24.10.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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दिल दुखाना नहीं भूले...

दुश्मन को भी सीने से लगाना नहीं भूले,
हम अपने बुजुर्गों का ज़माना नहीं भूले।

तुम आँखों की बरसात बचाये हुये रखना,
कुछ लोग अभी आग लगाना नहीं भूले।

ये बात अलग हाथ कलम हो गये अपने,
हम आप की तस्वीर बनाना नहीं भूले।

इक ऊम्र हुई मैं तो हँसी भूल चुका हूँ,
तुम अब भी मेरे दिल को दुखाना नहीं भूले।

~सागर आज़मी

एडमिन द्वारा दिनाँक 02.10.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें

तुम्हें माँगेंगे खुदा से...

सुनते हैं कि मिल जाती है हर चीज दुआ से,
इक रोज तुम्हें माँग के देखेंगे ख़ुदा से।

तुम सामने होते हो तो है कैफ की बारिश,
वो दिन भी थे जब आग बरसती थी घटा से।

ऐ दिल तू उन्हें देख के कुछ ऐसे तड़पना,
आ जाए हँसी उन को जो बैठे हैं खफ़ा से।

दुनिया भी मिली है गम-ए-दुनिया भी मिला है,
वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था ख़ुदा से।

~राणा अकबराबादी

तुम्हें माँगेंगे खुदा से शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 23.09.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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बिन बारिस बरसातें...

क्या पूछते हो कैसी ये बिन बारिस बरसातें है?
मेरी आँखों से जो गिरते है, तेरी ही सौगातें हैं।

सूखेगा अब कैसे मेरे आंखों का ये दरिया,
इस दरिया से होकर ही वो दिल में आते-जाते हैं।

ना लफ्ज नया ना हर्फ कोई ना कोई तराना नूतन,
भूली यादें याद आ जायें, वही गीत पुराने गाते हैं।

अब फासला हैं ही कहाँ तेरे-मेरे दरमियां,
हैं इतने करीब मगर, दूरियां दिखाते हैं।

अब आती नहीं हैं तेरी याद, ऐसी बात नहीं है,
मैं था तेरा आईना कभी, कहने भर की बातें हैं।

~संजीत पाराशर

संजीत पाराशर द्वारा दिनाँक 13.09.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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