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Intzaar Shayari in Hindi

मिलो उसी तड़प से...


लौट आओ और मिलो उसी तड़प से,
अब तो मुझे मेरी वफाओं का सिला दे दो,
इंतजार ख़त्म नहीं होता है आँखों का,
किसी शब् अपनी एक झलक दे दो।


मिलो उसी तड़प से शायरी

एडमिन द्वारा दिनाँक 03.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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चिराग बुझा दिया...


शब-ए-इंतज़ार की कशमकश में
न पूछ कैसे सहर हुई,
कभी एक चिराग जला दिया
कभी एक चिराग बुझा दिया।



एडमिन द्वारा दिनाँक 03.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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एतबार ना करता...


वो कह कर गया था कि लौटकर आऊँगा,
मैं इंतजार ना करता तो क्या करता,
वो झूठ भी बोल रहा था बड़े सलीके से,
मैं एतबार ना करता तो क्या क्या करता।


एतबार ना करता शायरी

एडमिन द्वारा दिनाँक 03.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

कासिद पयामे शौक...


कासिद पयामे-शौक को देना बहुत न तूल,
कहना फ़क़त ये उनसे कि आँखें तरस गयीं।



एडमिन द्वारा दिनाँक 03.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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फिर न इंतज़ार...


ता फिर न इंतज़ार में नींद आये उम्र भर,
आने का अहद कर गये आये जो ख्वाब में।

- मिर्ज़ा ग़ालिब


एडमिन द्वारा दिनाँक 02.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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