Read Shayari in Hindi

वो मेरा हमसफर...


वो मेरा हमसफर भी था वो मेरा राहगुजर भी था,
मंजिलें ही एक न थीं, दरमियाँ ये फासला भी था।


वो मेरा हमसफर शायरी

विनोद सिन्हा द्वारा दिनाँक 06.12.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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मोहब्बत से ज्यादा...


तूने मोहब्बत, मोहब्बत से ज्यादा की थी,
मैंने मोहब्बत तुझसे भी ज्यादा की थी,
अब किसे कहोगे मोहब्बत की इन्तेहाँ,
हमने शुरुआत ही इन्तेहाँ से ज्यादा की थी।



एडमिन द्वारा दिनाँक 06.12.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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कहीं के नहीं रहते...


सामान बाँध लिया है मैंने भी अब बताओ दोस्त,
वो लोग कहाँ रहते है जो कहीं के नहीं रहते।



एडमिन द्वारा दिनाँक 06.12.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

जान लुटा देते...


अपने दिल की जमाने को बता देते हैं,
हर एक राज से परदे को उठा देते हैं,
आप हमें चाहें न चाहें गिला नहीं इसका,
जिसे चाह लें हम उसपे जान लुटा देते हैं।


जान लुटा देते शायरी

एडमिन द्वारा दिनाँक 06.12.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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खींच लेती है मोहब्बत...


मुझे खींच ही लेती है हर बार उसकी मोहब्बत,
वरना बहुत बार मिला हूँ आखिरी बार उससे।



एडमिन द्वारा दिनाँक 05.12.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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