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इंतज़ार शायरी

तरसती हैं आँखें...

उनसे मिलने को तरसती हैं आँखें,
तरस तरस कर बरसती हैं आँखें,
बरस बरस कर जब थक जाती हैं आँखें,
तो फिर से मिलने को तरसती हैं आँखें।

ओ. पी. वर्मा द्वारा दिनाँक 06.11.17 को प्रस्तुत
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