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दर्द शायरी

छीन ली हमारी मोहब्बत...

खामोश फ़िज़ा थी कोई साया न था,
इस शहर में मुझसा कोई आया न था,
किसी ज़ुल्म ने छीन ली हम से हमारी मोहब्बत,
हमने तो किसी का दिल दुखाया न था।

कलीम द्वारा दिनाँक 01.10.17 को प्रस्तुत
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