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याद शायरी

मुझे याद रख...

मेरे दिल की मजबूरी को कोई इल्जाम न दे,
मुझे याद रख बेशक मेरा नाम न ले,
तेरा वहम है कि मैंने भुला दिया तुझे,
मेरी एक भी साँस ऐसी नहीं जो तेरा नाम न ले।

गणेशराम कुशवाह द्वारा दिनाँक 18.11.17 को प्रस्तुत
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