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ग़म शायरी

ग़म कोई समझ न पाया...

एक हसरत थी सच्चा प्यार पाने की,
मगर चल पड़ी आँधियां जमाने की,
मेरा ग़म तो कोई ना समझ पाया,
क्यूंकि मेरी आदत थी सबको हँसाने की।

दीपक सोनी गोहपारू द्वारा दिनाँक 24.05.17 को प्रस्तुत
अश्क़ शायरी

रुकते नहीं हैं आँसू...

कलम चलती है तो दिल की आवाज लिखता हूँ,
गम और जुदाई के अंदाज़-ए-बयां लिखता हूँ,
रुकते नहीं हैं मेरी आँखों से आँसू,
मैं जब भी उसकी याद में अल्फाज़ लिखता हूँ।

दीपक सोनी गोहपारू द्वारा दिनाँक 24.05.17 को प्रस्तुत
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