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उदासी शायरी

इतनी बेचैनी से तुमको...

इतनी बेचैनी से तुमको किसकी तलाश है,
वो कौन है जो तेरी आंखों की प्यास है,

जबसे मिला हूं तुमसे यही सोचता हूं मैं,
क्यों मेरे दिल को हो रहा तेरा एहसास है,

जिंदगी के इस मोड़ पे तुम आके यूं मिले,
जैसे कि कोई मंजिल मेरे इतने पास है,

एक नजर की आस में तकता हूं मैं तुझे,
अब देख तेरे खातिर एक आशिक उदास है ।

Ek Aashiq Udaas Hai...

Itani Bechaini Se Tumko Kiski Talash Hai,
Wo Kaun Hai Jo Teri Aankho Ki Pyaas Hai,

Jabse Mila Hoon Tumse Yehi Sochta Hoon Main,
Kyun Mere Dil Ko Ho Raha Tera Ehsaas Hai,

Zindgi Ke Is Mod Pe Tum Aake Humse Yun Mile,
Jaise Ki Koyi Manzil Mere Itne Paas Hai,

Ek Nazar Ki Aas Me Takta Hoon Main Tujhe,
Ab Dekh Tere Khatir Ek Aashiq Udaas Hai !

पंकज कुमार द्वारा दिनाँक 19.06.15 को प्रस्तुत
याद शायरी

तुझे प्यार मेरा सतायेगा...

तुझे प्यार मेरा सतायेगा अक्सर,
यादो के तूफ़ान उठायेगा अक्सर,
जिक्र मेरा करने से पहले,
तू कुछ सोच के मुस्कराएगी अक्सर,
मेरा नाम लिख कर किताबो मे अपनी,
तू लोगो के डर से मिटायेगी अक्सर,
बात मेरी याद आयेगी इतनी,
जितना तु उन्हे भुलायेगी अक्सर..!!

पंकज कुमार द्वारा दिनाँक 23.06.15 को प्रस्तुत
अश्क़ शायरी

कौन कहता है कि आंसुओं...

कौन कहता है कि
आंसुओं में वज़न नहीं होता,
एक भी छलक जाता है
तो मन हल्का हो जाता है ।

Kaun Kahta Hai Ki...

Kaun Kahta Hai Ki
Aashuon Me Wajan Hai Hota,
Ek Bhi Chhalak Jata Hai
To Man Halka Ho Jata Hai!

पंकज कुमार द्वारा दिनाँक 24.06.15 को प्रस्तुत
मौसम शायरी

दिल की बाते कौन जाने...

दिल की बाते कौन जाने,
मेरे हालात को कौन जाने,
बस बारिश का मौसम है,
पर दिल की ख्वाहिश कौन जाने,
मेरी प्यास का एहसास कौन जाने ?

Dil Ki Baate...

Dil Ki Baate Kaun Jaane,
Mere Halaat Ko Kaun Jaane,
Bas Barish Ka Mausam Hai,
Par Dil Ki Khwahish Ko Kaun Jaane,
Meri Pyaas Ka Ehsaas Kaun Jaane ?

पंकज कुमार द्वारा दिनाँक 24.06.15 को प्रस्तुत
तारीफ़ शायरी

जैसे धुऐं के पीछे से...

जैसे धुऐं के पीछे से सूरज का चमकना,
घने बादलों के पीछे से चाँद का खिलना,
पंखुडियाँ खोलकर कमल का खिलखिलाना,
वैसे घूँघट की आड से तेरा लाजवाब मुस्कुराना।

Tera Lajabaaj Muskurana...

Jaise Dhuyen Ke Peechhe Se Suraj Ka Chamkana,
Ghane Baadalon Ke Peechhe Se Chaand Ka Dikhna,
Pankhudiyan Khol Kar Kamal Ka Khil-khilana,
Waise Ghooghat Ki Aad Se Tera Lajabaaj Muskurana !

पंकज कुमार द्वारा दिनाँक 24.06.15 को प्रस्तुत

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