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बेवफा शायरी

वो बेवफा न लगे...

न जाने क्या है..? उसकी उदास आंखों में,
वो मुँह छुपा के भी जाये तो बेवफा न लगे।

मुकुल चौहान द्वारा दिनाँक 12.11.17 को प्रस्तुत
दर्द शायरी

करूँ जो आह तो...

वो खून बनके मेरी रगों में मचलता है,
करूँ जो आह तो लब से धुँआ निकलता है,
मोहब्बत का रिश्ता भी अजीब है यारों,
ये ऐसा घर है जो बरसात में भी जलता है।

मुकुल चौहान द्वारा दिनाँक 13.11.17 को प्रस्तुत
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