Search Results for - रविशंकर सोनारे

शिक़वा शायरी

रेत का महल...

तुम क्यों बनाते हो रेत का महल,
एक दिन तुम्हीं इन्हें मिटाओगे,
आज तुम कहते हो कि तुम मेरे हो,
कल मेरा नाम तक भूल जाओगे।

Naam Tak Bhool Jaaoge...

Tum Kyun Banate Ho Ret Ke Mahal,
Ek Din Tumhin Inhein Mitaaoge,
Aaj Tum Kahte Ho Ke Tum Mere Ho,
Kal Mera Naam Tak Bhool Jaaoge.

रविशंकर सोनारे द्वारा दिनाँक 12-06-2017 को प्रस्तुत
पेज शेयर करें
   
© 2015-2018 हिंदी-शायरी.इन | डिसक्लेमर | संपर्क करें | साईटमैप
Best Shayari in hindi | Love Sad Funny Shayari and Status in Hindi