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जिंदगी शायरी

क्या बेचकर हम खरीदें...

क्या बेचकर हम खरीदें फुर्सत... ऐ जिंदगी,
सब कुछ तो गिरवी पड़ा है जिम्मेदारी के बाजार में।

श्रीकांत दरने द्वारा दिनाँक 01.11.17 को प्रस्तुत
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