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दर्द शायरी

कुछ है घायल...

ये क्या है जो आँखों से रिसता है,
कुछ है भीतर जो यूं ही दुखता है,
कह सकता हूँ पर कहता भी नहीं,
कुछ है घायल जो यहाँ सिसकता है।

सतीशचंद चौरसिया द्वारा दिनाँक 19.05.17 को प्रस्तुत
बेवफा शायरी

बेवफाई का इल्ज़ाम...

हमने चाहा था जिसे उसे दिल से भुलाया न गया,
जख्म अपने दिल का लोगों से छुपाया न गया,
बेवफाई के बाद भी प्यार करता है दिल उनसे,
कि बेवफाई का इल्ज़ाम भी उस पर लगाया न गया।

Bewafai Ke Baad Bhi...

Humne Chaha Tha Jise Usey Dil Se Bhulaya Na Gaya,
Zakhm Apne Dil Ka Logon Se Chhupaya Na Gaya.
Bewafai Ke Baad Bhi Pyar Karta Hai Dil Unn Se,
Ke Bewafai Ka ilzam Bhi Unn Par Lagaya Na Gaya.

सतीशचंद चौरसिया द्वारा दिनाँक 19.05.17 को प्रस्तुत
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