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हिंदी उर्दू ग़ज़ल

यूँ आँखों से ये बातें...

हमें प्यार की भाषा नहीं आती अजनबी,
यूँ आँखों से ये बातें बनाया न कीजिए।

ज़रा नादान हैं हम अभी इश्क में सनम,
यूँ सबक इश्क़ के हमें पढ़ाया न कीजिए।

न रोका कीजिए हमें राहों में इस तरह,
यूँ पकड़ के कलाई हमें सताया न कीजिए।

पत्थरों के हैं मौसम काँच के हैं रास्ते,
ख़्वाबों के इस शहर में ले जाया न कीजिए।

हम तुम्हारे हैं तो हो जाएंगे तुम्हारे,
यूँ मोहब्बत को सरे-आम दिखाया न कीजिए।

न कीजिए तारीफ हर बात में हमारी,
महफ़िलों में ग़ज़लें यूँ गाया न कीजिए।

होता है जिक्र साथ जो तुम्हारा और मेरा
बेहताशा इस कदर मुस्कुराया न कीजिए।

सुना है पूछते सब आपसे नाम हमारा,
गुजारिश है साहिब किसी से बताया न कीजिए।

हम डरते हैं बदनाम हो जाने से जरा,
मगर गुमनाम भी हमें बताया न कीजिए।

हिमांकर अजनबी

हिमांकर अजनबी द्वारा दिनाँक 26.10.17 को प्रस्तुत
हिंदी उर्दू ग़ज़ल

तेरा मिल जाना...

वो हर रोज गुजरकर तेरी गली से जाना याद आता है,
खुदा ना खास्ता वो तेरा मिल जाना याद आता है।

यूँ ही गुजर गया वो जमाना तुम्हारे इन्तजार का,
आज भी मुझे वो गुजरा जमाना याद आता है।

सुना है कि आज भी हमारी बातें करते है लोग,
आज भी सबको वो अपना अफसाना याद आता है।

तुम भी मुस्कुराती हो बेवजह अक्सर आईने में,
सुना है तुमको भी अपना ये दीवाना याद आता है।

तब तुमसे मिला करते थे छुप छुप के हम,
हर आहट से तेरा वो घबराना याद आता है।

मैं शुक्रगुजार हूँ उन सर्द हवाओं का आज भी,
वो ठंड में हम दोनों का लिपट जाना याद आता है।

आज भी जब मैं मुस्कुराता हूँ कभी आईने में,
मुझे देखकर तेरा वो मुस्कुराना याद आता है।

बस यादें ही रह गयी और कुछ न बचा यहाँ,
कभी तेरा हँसाना कभी सताना याद आता है।

~हिमांकर अजनबी

हिमांकर अजनबी द्वारा दिनाँक 30.10.17 को प्रस्तुत
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