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हिंदी में शिक़वा शायरी

रूठ के जाना तेरा...

ले गया जान मेरी... रूठ के जाना तेरा,
ऐसे आने से तो बेहतर था, न आना तेरा।

रूठ के जाना तेरा शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 30.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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दूरियां तो मिटा दूँ...

तुझसे दूरियां तो मिटा दूँ मैं... एक पल में मगर,
कभी कदम नहीं चलते कभी रास्ते नहीं मिलते।

एडमिन द्वारा दिनाँक 30.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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शिकवे तो कम नहीं...

घुट घुट के जी रहा हूँ तेरी नौकरी में ऐ दिल,
बेहतर तो होगा अब तू कर दे मेरा हिसाब,
शिकवे तो कम नहीं है पर क्या करुं शिकायत,
कहीं हो न जाएं तुझसे रिश्ते मेरा खराब।

राजेश कुमार वर्मा द्वारा दिनाँक 29.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

उसकी चालाकियाँ...

उसे लगता है कि उसकी चालाकियाँ
मुझे समझ नहीं आती,
मैं बड़ी खामोशी से देखता हूँ
उसे अपनी नज़रों से गिरते हुए।

उसकी चालाकियाँ शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 29.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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हम बिकते रहे...

तुझे फुर्सत ही न मिली मुझे पढ़ने की वरना,
हम तेरे शहर में बिकते रहे किताबों की तरह।

हम बिकते रहे शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 27.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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