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Shikwa Shayari in Hindi

कसूर किसका था...


दिमाग पर जोर डालकर गिनते हो
गलतियाँ मेरी,
कभी दिल पर हाथ रख कर पूछना
कि कसूर किसका था।


कसूर किसका था शायरी

प्रियादीप द्वारा दिनाँक 03.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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न जाने क्यों लोग...


न जाने क्यों लोग अपना बना के सज़ा देते है,
जिंदगी छीन के... ज़िन्दगी की दुआ देते है ।



तनु डोंगरे द्वारा दिनाँक 25.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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बख्शे हम भी न...


बख्शे हम भी न गए बख्शे तुम भी न जाओगे,
वक्त जानता है हर चेहरे को बेनकाब करना।



एडमिन द्वारा दिनाँक 16.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

शिकायतें सारी...


शिकायतें सारी जोड़ जोड़ कर रखी थी मैंने,
उसने गले लगाकर सारा हिसाब बिगाड़ दिया।


शिकायतें सारी शायरी

एडमिन द्वारा दिनाँक 14.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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आज भी प्यार...


आज भी प्यार करता हूँ तुझसे,
ये नहीं कि कोई मिली ही नहीं,
मिलीं तो बहुत तेरे बाद पर,
तू किसी चेहरे में दिखीं ही नहीं।



गिर्राज मीना द्वारा दिनाँक 13.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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