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हिंदी में शिक़वा शायरी

हाथ नहीं थामा...

बस एक मेरा ही हाथ नहीं थामा उस ने,
वरना गिरते हुए कितने ही संभाले उसने।

हाथ नहीं थामा शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 09.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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फिर ना आ सकोगे...

तुम फिर ना आ सकोगे,
बताना तो था ना मुझे,
तुम दूर जा कर बस गए,
और मैं ढूंढ़ता ही रह गया।

एडमिन द्वारा दिनाँक 09.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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बहाने कितने...

मुझसे मिलने को करता था बहाने कितने,
अब मेरे बिना गुजारेगा वो जमाने कितने।

बहाने कितने शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 09.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

इस दुनिया में ज़माने...

इस दुनिया में ज़माने से लड़ना आसान है
कम से कम हार जीत का पता तो चलता है,
मगर खुद से लड़ना बहुत मुश्किल है
हार जीत का पता ही नहीं चलता...
दिमाग कुछ और सोचता है और दिल कुछ और करता है।

अनिल कुमार साहू द्वारा दिनाँक 16.08.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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किसकी जान जाती है...

अब देखिये तो किस की जान जाती है,
मैंने उसकी और उसने मेरी कसम खायी है।

एडमिन द्वारा दिनाँक 05.07.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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