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हिंदी में शिक़वा शायरी

उनकी नजर में फर्क...

उनकी नजर में कोई फर्क आज भी नहीं,
पहले मुड़कर देखते थे अब देखकर मुड़ जाते हैं।⁠⁠⁠⁠

विजय कुमार बिन्दास राजा द्वारा दिनाँक 25.04.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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महबूब बना कर देख...

मेरे सिवा किसी और को
महबूब बना कर देख ले,
तेरी हर धड़कन खुद कहेगी
कि ये वफा कुछ और ही है।

एडमिन द्वारा दिनाँक 22.04.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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सितम का हिसाब...

वो मेरे करम उँगलियों पे गिनते हैं,
सितम का जिनके कोई हिसाब नहीं।

एडमिन द्वारा दिनाँक 19.04.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें

मेरे दिल को जलाके...

जो मनाई है दिवाली, मेरे दिल को जलाके,
अब होली भी मना लेना, बची ख़ाक उड़ाके।

साहिबा रब द्वारा दिनाँक 18.04.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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क्यूँ तकलीफ होती...

अब क्यूँ तकलीफ होती है तुम्हें इस बेरुखी से,
तुम्हीं ने तो सिखाया है कि दिल कैसे जलाते हैं।

एडमिन द्वारा दिनाँक 08.12.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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