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हिंदी में शिक़वा शायरी

भुला क्यों नहीं देते...

हमसे प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते,
खत किसलिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते,
किस वास्ते लिखा है हथेली पर मेरा नाम,
मैं हर्फ़ गलत हूँ तो मिटा क्यों नहीं देते।

एडमिन द्वारा दिनाँक 28.06.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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हमसफर कोई होता...

हमसफर कोई होता तो
हम भी बाँट लेते दूरियाँ,
राह चलते लोग भला
क्या समझेंगे मेरी मजबूरियाँ।

हमसफर कोई होता शायरी
राजेश सिंह बुटोला द्वारा दिनाँक 16.06.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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रेत का महल...

तुम क्यों बनाते हो रेत का महल,
एक दिन तुम्हीं इन्हें मिटाओगे,
आज तुम कहते हो कि तुम मेरे हो,
कल मेरा नाम तक भूल जाओगे।

रविशंकर सोनारे द्वारा दिनाँक 12.06.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें

उसके बिना जीना...

जिंदगी हसीन है पर जीना नहीं आता,
हर चीज में नशा है पर पीना नहीं आता,
सब मेरे बगैर जी सकते हैं
बस मुझे ही किसी के बिना जीना नहीं आता।

एस.एल. जोशी द्वारा दिनाँक 18.05.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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तुमने चाहा ही नहीं...

तुमने चाहा ही नहीं ये हालात बदल सकते थे,
तुम्हारे आँसू मेरी आँखों से भी निकल सकते थे,
तुम तो ठहरे रहे झील के पानी की तरह बस,
दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे।

एडमिन द्वारा दिनाँक 08.05.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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