तन्हाई शायरी

भरी महफिल में

वो शख्स भरी महफिल में भी मेरी तरह तन्हा है,
उसे ना पीने का शौक है... ना पिलाने का।

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तुम भी जो होते

मैं हूँ दिल है तन्हाई है,
तुम भी जो होते तो अच्छा होता।

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एक पुराना मौसम

एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी,
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तनहाई भी।

तन्हाई की बातें

अजब से वो दिन थे अजब सी वो रातें,
तन्हाई में तन्हाई से तन्हाई की बातें।

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Jab Uss Se Bichhade

Uss Se Bichhade Toh Maloom Hua,
Ke Maut Bhi Koi Cheej Hai Faraz,
Zindagi Woh Thi... Jo Hum,
Uski Mehfil Mein Gujaar Aaye.

उस से बिछड़े तो मालूम हुआ
कि मौत भी कोई चीज़ है फ़राज़
ज़िन्दगी वो थी.......... जो हम
उसकी महफ़िल में गुज़ार आए ।

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Chhod Jate Ho Tanha

Ek Pal Ka Ahsaas BanKar Aate Ho Tum,
Doosre Hi Pal Khwab BanKar Ud Jate Ho Tum,
Jante Ho Ke Lagta Hai Darr Tanhayion Se,
Phir Bhi Baar-Baar Tanha Chhod Jate Ho Tum.

एक पल का एहसास बनकर आते हो तुम,
दूसरे ही पल ख्वाब बनकर उड़ जाते हो तुम,
जानते हो कि लगता है डर तन्हाइयों से,
फिर भी बार बार तन्हा छोड़ जाते हो तुम।

Dil Ki Wahi Tanhai

Sau Baar Chaman Mehka,
Sau Baar Bahaar Aayi,
Duniya Ki Wahi Raunak,
Dil Ki Wahi Tanhai.

सौ बार चमन महका,
सौ बार बहार आई,
दुनिया की वही रौनक,
दिल की वही तन्हाई।

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Meri Mohabbat Hai Woh

Meri Mohabbat Hai Woh Koi Majboori Toh Nahi,
Woh Mujhe Chahe Ya Mil Jaye Jaruri Toh Nahi,
Yeh Kuchh Kam Hai Ki Basaa Hai Meri Saanson Mein Woh,
Saamne Ho Meri Aankhon Ke Jaruri Toh Nahi.

मेरी मोहब्बत है वो कोई मज़बूरी तो नही,
वो मुझे चाहे या मिल जाये, जरूरी तो नही,
ये कुछ कम है कि बसा है मेरी साँसों में वो,
सामने हो मेरी आँखों के जरूरी तो नही ।