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हिंदी में तारीफ़ शायरी

ख़ूब पर्दा है...

ख़ूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं...
साफ़ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं।

एडमिन द्वारा दिनाँक 10.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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तबस्सुम भी हया भी...

इश्वा भी है शोख़ी भी तबस्सुम भी हया भी,
ज़ालिम में और इक बात है इस सब के सिवा भी।

एडमिन द्वारा दिनाँक 26.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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हुस्न की बात चली...

चुप ना होगी हवा भी, कुछ कहेगी घटा भी,
और मुमकिन है तेरा, जिक्र कर दे खुद़ा भी।
फिर तो पत्थर ही शायद ज़ब्त से काम लेंगे,
हुस्न की बात चली तो, सब तेरा नाम लेंगे।

एडमिन द्वारा दिनाँक 15.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

क़यामत की शोख़ियाँ...

दिल में समा गई हैं क़यामत की शोख़ियाँ,
दो-चार दिन रहा था किसी की निगाह में।

एडमिन द्वारा दिनाँक 15.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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तेरी आँखों के सिवा...

मैने समझा था कि तू है तो दरख़्शां है हयात,
तेरा ग़म है तो ग़मे-दहर का झगड़ा क्या है,
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात,
तेरी आँखों के सिवा दुनिया मे रक्खा क्या है।

~ फैज़ अहमद फैज़
एडमिन द्वारा दिनाँक 28.08.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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