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हिंदी में तारीफ़ शायरी

हुस्न की इन्तेहाँ...

हुस्न की ये इन्तेहाँ नहीं है तो और क्या है,
चाँद को देखा है हथेली पे आफताब लिए हुए।

हुस्न की इन्तेहाँ शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 25.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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हया से सर झुका लेना...

हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना,
हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना।

हया से सर झुका लेना शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 24.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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तेरी आँखें...

अब तक मेरी यादों से मिटाए नहीं मिटता,
भीगी हुई इक शाम का मंज़र तेरी आँखें।

तेरी आँखें शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 24.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

नाज़ुकी लब की...

नाज़ुकी उसके लब की क्या कहिए,
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है।

~ मीर तक़ी मीर
नाज़ुकी लब की शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 02.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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जलवे मचल पड़े...

जलवे मचल पड़े तो सहर का गुमाँ हुआ,
ज़ुल्फ़ें बिखर गईं तो स्याह रात हो गई।

जलवे मचल पड़े शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 21.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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