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हिंदी में व्हाट्सएप स्टेटस

रावण बनना कहाँ आसान...

रावण बनना भी कहां आसान...

रावण में अहंकार था तो पश्चाताप भी था...

रावण में वासना थी तो संयम भी था...

रावण में सीता के अपहरण की ताकत थी
तो बिना सहमति परस्त्री को स्पर्श न करने का संकल्प भी था...

सीता जीवित मिली ये राम की ही ताकत थी
पर पवित्र मिली ये रावण की भी मर्यादा थी

राम, तुम्हारे युग का रावण अच्छा था
दस के दस चेहरे, सब बाहर रखता था...

महसूस किया है कभी
उस जलते हुए रावण का दुःख
जो सामने खड़ी भीड़ से
बारबार पूछ रहा था...

तुम में से कोई राम है क्या..

मनीष उपाध्याय द्वारा दिनाँक 01.10.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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मिर्ची का मौसम...

पत्नी : अजी सुनते हो! ये मिर्ची किस मौसम में लगती है।
पति (प्यार से) : इसका कोई विशेष मौसम नहीं होता है जब बात बुरी लग जाए तब लग जाती है।

बंटी द्वारा दिनाँक 28.06.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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बख्श देता है खुदा...

क्या खूब लिखा है किसी ने...

बख्श देता है खुदा उनको जिनकी किस्मत ख़राब होती है
वो हरगिज नहीं बक्शे जाते जिनकी नियत ख़राब होती है।

न मेरा एक होगा न तेरा लाख होगा
न तारीफ़ तेरी होगी न मजाक मेरा होगा
गरूर न कर इस शरीर का
मेरा भी खाक होगा तेरा भी खाक होगा।

जिन्दगी भर ब्रांडेड ब्रांडेड करने वालो
याद रखना कफ़न का कोई ब्रांड नहीं होता।

कोई रो कर दिल बहलाता है कोई हँस कर दर्द छुपाता है
क्या करामात है कुदरत का
जिन्दा इन्सान पानी में डूब जाता है और मुर्दा तैर के दिखता है।

मौत को देखा तो नहीं पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी
कमबख्त जो भी उससे मिलता है जीना छोड़ देता है।

गजब की एकता देखी लोगों की ज़माने में
जिन्दो को गिराने की और मुर्दों को उठाने की।

जिन्दगी में न जाने कौन सी बात आखिरी होगी
न जाने कौन सी रात आखिरी होगी
मिलते जुलते बातें करते रहो यारों
एक दूसरे से न जाने कौन सी मुलाकात आखिरी होगी।

मधुसूदन रांकावत सूरत द्वारा दिनाँक 01.05.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें

मत खेलो मेरे जज़्बातों से...

मत खेलो मेरे जज़्बातों से यारों,
बहुत नाज़ुक मिजाज़ हूँ...
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तुम्हें खबर भी न होगी और,
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एक दिन...
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यूँ ही... हँसते-हँसते...
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किसी दिन कनपट सेंक दूँगा...

क्या मतलब रहेगा फिर...!!

समरजीत वर्मा द्वारा दिनाँक 24.12.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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सन्यास ही ले लूँ...

कभी कभी तो लगता है कि
ये दौलत , ये शोहरत , तमाम ऐशो
आराम त्याग कर सन्यास ही ले लूँ

फिर खयाल आता है।
पहले ये सब मिले तो सही...!

एडमिन द्वारा दिनाँक 09.12.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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