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हम बिकते रहे

( एडमिन द्वारा दिनाँक 27-11-2016 को प्रस्तुत )
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तुझे फुर्सत ही न मिली मुझे पढ़ने की वरना,
हम तेरे शहर में बिकते रहे किताबों की तरह।

हम बिकते रहे शायरी
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