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गुज़रे दिनों की भूली

( एडमिन द्वारा दिनाँक 15-06-2015 को प्रस्तुत )
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गुज़रे दिनों की भूली हुई बात की तरह,
आँखों में जागता है कोई रात की तरह,
उससे उम्मीद थी की निभाएगा साथ वो,
वो भी बदल गया मेरे हालात की तरह ।

गुज़रे दिनों की भूली शायरी
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