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जैसे धुऐं के पीछे से

( पंकज कुमार द्वारा दिनाँक 24-06-2015 को प्रस्तुत )
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जैसे धुऐं के पीछे से सूरज का चमकना,
घने बादलों के पीछे से चाँद का खिलना,
पंखुडियाँ खोलकर कमल का खिलखिलाना,
वैसे घूँघट की आड से तेरा लाजवाब मुस्कुराना।

जैसे धुऐं के पीछे से शायरी
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