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तुमने चाहा ही नहीं

( एडमिन द्वारा दिनाँक 08-05-2017 को प्रस्तुत )
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तुमने चाहा ही नहीं ये हालात बदल सकते थे,
तुम्हारे आँसू मेरी आँखों से भी निकल सकते थे,
तुम तो ठहरे रहे झील के पानी की तरह बस,
दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे।

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