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समर में घाव खाता है

( अमृत लाल द्वारा दिनाँक 20-09-2017 को प्रस्तुत )
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समर में घाव खाता है उसी का मान होता है,
छिपा उस वेदना में अमर बलिदान होता है,
सृजन में चोट खाता है छेनी और हथौड़ी का,
वही पाषाण मंदिर में कहीं भगवान होता है।

समर में घाव खाता है शायरी
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