होम / रोमांटिक शायरी / सुर्ख गुलाब सी तुम

सुर्ख गुलाब सी तुम

( राजेंद्र द्वारा दिनाँक 14-11-2017 को प्रस्तुत )
-Advertisement-

सुर्ख गुलाब सी तुम हो,
जिन्दगी के बहाव सी तुम हो,
हर कोई पढ़ने को बेकरार,
पढ़ने वाली किताब सी तुम हो।

तुम्हीं हो फगवां की सर्द हवा,
मौसम की पहली बरसात सी तुम हो,
समन्दर से भी गहरी,
आशिकों के ख्वाब सी तुम हो।

रहनुमा हो जमाने की,
जीने के अन्दाज सी तुम हो,
नजर हैं कातिलाना,
बोतलों में बन्द शराब सी तुम हो।

गुनगुनी धुप हो शीत की,
तपती घूप मैं छाँव सी तुम हो,
आरती का दीप हो,
भक्ति के आर्शीवाद सी तुम हों।

ता उम्र लिखता रहे कुमार
हर सवाल के जवाब सी तुम हो।

~राजेंद्र कुमार

सुर्ख गुलाब सी तुम शायरी
-Advertisement-

आप इन्हें भी पसंद करेंगे

-Advertisement-
हमसे जुड़ें
फेसबुक पेज
पेज शेयर करें
 
© 2015-2019 हिंदी-शायरी.इन | डिसक्लेमर | संपर्क करें | साईटमैप
Best Shayari in hindi | Love Sad Funny Shayari and Status in Hindi